दिल के झरोखे से

दिल के झरोखे से देखो
भगवान की मूरत
इस सृष्टि के हर कण में खोजो
इंसान की सूरत
बुलबुले हैं जमीं पे पलती जिन्दगियां
हवा और पानी से बनी
यह ना बादल हैं जो
आसमां पे मंडरायेंगे
पलभर में
फूट जायेंगे
पता भी ना पड़ेगा
हाथों से छूट जायेंगे
कितना पीछे भागना
याद करना
जो इस दुनिया के मेले में बिछड़े
हाथ कभी ना आयेंगे
हृदय में बसा ले राम नाम को
चल विचल
जीवित अजीवित
सब एक सांसों के बहते दरिया
से जीवन्त
तेरे मन में समा जायेंगे।

मीनल

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