मेरे अल्फाज

1 चलना है, चलना है चलते ही जाना है, ना झुकना है ना रुकना है, बस मंजिल को पाना है

2यूँ ही नहीं मिलती मंजिल किसी को बहुत कुछ खोना पड़ता हैं, एक बसंत को पाने के लिए पतझड़ को भी सहना पड़ता है

:कुमार किशन कीर्ति,युवा शायर,लेखक

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Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

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