माँ

कही अगर निश्वार्थ प्रेम है, तो माँ की गोद मे ही है जो अपनी प्राणो से बढ़कर बच्चों को प्रेम दे,वो माँ ही तो है

माँ की उम्र गुजरती जाती है, बच्चों की चिंता-फिक्र में अपनी खुशी तलाशती हैं माँ बच्चों की खुशियों में

कभी रक्षक बनकर बच्चों की रक्षा करती हैं माँ, तो कभी शिक्षक बनकर बच्चों को ज्ञान देती हैं माँ

माँ को रुलाकर जो देवी माँ की पूजा करते हैं, देवी माँ की आशीष वे कभी नहीं पाते हैं

:कुमार किशन कीर्ति,युवा लेखक

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Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

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