अभिवृत्ति

मुख की मुद्राएं भिन्न भिन्न हैं
मन की धारणाएं भिन्न भिन्न हैं
प्रतिपल की अभिलाषाएं भिन्न भिन्न हैं
कहने को दिख रहा दृश्य एक है
उसे देखने की
उसे जानने की
उसको समझने की
उसको परखने की
उसे आंकने की
उसे विचारने की
उसको मन में समाने की
उसे जीवन में उतारने की
उसके प्रति संवेदनशील होने की
उसके प्रति कोई दृष्टिकोण अपनाने की
उसे अंतर्मन में उतारने की
उसे स्वयं में समाहित करने की
उसे मनन करने की
उसमें सम्भावनाएं तलाशने की
उसे स्वीकारने की
उसे नकारने की
उसे कोटि कोटि प्रणाम करने की
उसे ठुकराने की
उसे गले लगाने की
उसे दुत्कारने की
उसे समीप लाने की
उससे दूर जाने की
उसका मनोबल बढ़ाने की
उसका हौसला गिराने की
उसे सच मानने की
उसे झूठा ठहराने की
उसे मित्र मानने की
उसे शत्रु समझने की
उससे व्यवहारकुशल होने की
उससे दुर्व्यवहार करने की
उसकी समाज में प्रतिष्ठा
बढ़ाने की
उसका चरित्र उछालने की
उसे पुरस्कृत करने की
उसे अपमानित करने की
उसे अग्नि की भांति जलाने की
उसे जल की तरह बहाने की
उसे देवी की तरह पूजने की
उसे पत्थर की तरह तुड़वाने की
उसे उच्च स्थान पर सुशोभित
करने की
उसे निम्न स्थान की राह
दिखाने की
उसकी भूरी भूरी प्रशंसा करने की
उसे निंदा का पात्र बनाने की
उसे फूलों का हार
पहनाने की
उसे कांटों का दामन
चुभाने की
उसे आसमां में बैठाने की
उसे जमीं पे धकेलने की
अभिवृत्तियां
अलग अलग हैं।

मीनल

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