किस्मत का कंवल

न कोई ओर न कोई छोर
फिर भी जीवन की लय से बांध रखी
सांसों की डोर
यह दुनिया एक श्वेत पटल ही है
और मैं इसपे पड़ती एक
श्यामल परछाई
हर व्यक्ति के
जीवन की यात्रा उसके
मन से अन्तर्मन तक ही है
आंखों से दिखती हो चाहे तो
कितने ही रंग-रूपों की छाया
जीवन का तालाब एक पानी की
स्थिर लकीर सा है
एक पत्थर मार इसमें थोड़ी
हलचल करते हैं
खिल जाये कोई कंवल
अपनी किस्मत का
रब से यह दुआ करते
हैं।

मीनल

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