किला मोहब्बत का

मुझे जीवन में क्या चाहिए
बस तेरे प्यार की सौगात
चाहिए
आसमान में छाये काले बादल
तो बस एक चुटकी में
छट जायेंगे
सीने पे हाथ रख दूं तो
दिल में धड़कती धड़कनों की
बरसात चाहिए
चुभते हैं खंजर से
लोगों के अपशब्द
तेरे अपनेपन की फुहार में
सब भूल जाती हूं
इन खेत में खड़ी फसलों की
तरह ही
वयस्क हो गई हूं
तेरी गोद में सिर रखकर मैं
यह भूल जाती हूं
मौत भी कभी गर कर दे जो
हमको जुदा
तोड़ दे रिश्तों की जंजीर
हो जाये बेवफा
कसम खुदा की
दिल में जो किला फतह
किया है तेरी मोहब्बत का
उसपे परचम जो लहराया है
तेरी इबादत का
उसमें पलती तेरी यादों को
कभी मरने न दूंगी।

मीनल

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