मुझसे ओ मिलने आती थी

टकटकी लगाये रहती थी वह ||
देख हमे मुस्काती थी ||
सबसे नजर बचा करके वह ||
सपनो में मिलने आती थी ||

सखियों से हाल हमारा लेती ||
करती पता ठिकाने को ||
क्लास रूम में कोशिश करती ||
नजदीक हमारे आने को ||
नैना चार जब हो जाते तो ||
खड़ी खड़ी शर्माती थी ||
सबसे नजर बचा करके वह ||
सपनो में मिलने आती थी ||

आँखों से दिल में बसने को ||
बेतहाशा वह लालाइत थी ||
अपना उसे बनाने की भी ||
दिल की हमारे ख्वाहिश थी ||
प्रेम बाग़ के प्रेम कली की ||
खुश्बू खूब लुटाती थी ||
सबसे नजर बचा करके वह ||
सपनो में मिलने आती थी ||

रूठ गयी किस्मत दोनों की ||
उसका साथ नहीं मिल पाया ||
ख़ास जो उसका बना था पहले ||
आज बना हूँ यार पराया ||
मै अपनी डगर वह अपने नगर ||
अब भी याद वह आती है ||
सबसे नजर बचा करके वह ||
सपनो में मिलने आती थी ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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