विध्यार्थी जीवन

जब सारी दुनिया सोती थी, हम राते काली करते थे ,
जब सारी दुनिया जगती थी,हम घोड़े बेच के सोते थे ।
अब ठान लिया हमने की,लक्ष्य को पाकर आना हे ,
लक्ष्य जो हमसे दूर खडा हे ,पास मे उसके जाना हे ,
हिन्द देश के हम वासी हे लक्ष्य को पाकर आयेगे,
ठान लिया जो अब हमने उसको करके दिखलायेंगे ।
निकल पड़े हे हम अपनी राह पे, आगे जाने क्या होगा ,
राहो मे पत्थर होन्गे रुक-रुक कर चलना होगा
राहो मे काँटे भी होंगे ,उन्हे लान्गकर चलना होगा
राहो मे कुछ मोड़ भी होंगे सोच-समझकर मुड़ना होगा ।
दिल मे कुछ घबराहट हो तो दिल को भी समझाना होगा ।

पीछे की चिंता मत करना आगे ही तुम्हे बढ़ना होगा ।

आगे ही तुम्हे बढ़ना होगा ,,,,,,

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