नेता जी का अफ़सोस

 

गली गली चौराहे पर॥
हमको चिपकाया लोगो ने॥

घर घर के दीवारों पर ॥
हमको लटकाया लोगो ने॥

जूते चप्पल की नदी बही थी॥
हमको जलाया लोगो ने॥

जै जै कार के नारे लगते॥
माला पहनाया लोगो ने॥

नदी खेत और जंगल में॥
हमको दौडाया लोगो ने॥

हाथी घोडा और गधा पर॥
हमको बैठाया लोग ने॥

नदी तालाब ईनारो में॥
हमको फेंकवाया लोगो ने॥

गन्दी गन्दी सड़क किनारे॥
झाडू पकडाया लोगो ने॥

शूट बूट को उतार के फेका॥
धोती पहनाया लोगो ने॥

बुरे कर्म की लाल जो स्याही॥
उसको पकडाया लोगो ने॥

१२व्यन्जन की पकवानो का॥
स्वाद चखाया लोगो ने॥

अब कुर्सी से खिसक गया हूँ॥
उससे उतरवाया लोगो ने॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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