हमारी दोस्ती

बीज से दरख्त बन गई
हमारी दोस्ती
जमीं पे सूरज तो कभी चाँद बन
चमक गई
हमारी दोस्ती
गले में जो पड़े
बाहों के हार
तन की राह
मन से मिलने चली
हमारी दोस्ती
अहं की कहीं कोई जगह
नहीं
वहम के ठिकाने का कोई अता पता
नहीं
घर से बाहर निकल
प्यार की मन्जिल की ओर
बढ़ चली
हमारी दोस्ती।

मीनल

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