मेरे प्रेम गीत

रात ढलती रही , शम्मा जलती रही

तुम गुनगुनाते रहे , हम मुस्कुराते रहे

चाँद ने पहरा, हम पर बराबर दिया

जुगनुओं ने आँचल को, रोशन किया

घड़ी वक्त की , टिकटिकाती रही

सुबह आने को है , यह जताती रही

फड़फड़ाती पलक , और लरज़ते अधर

पल ऐसे के ऐसा , यूँ रुक जाये गर

धड़कन में मेरी , घुली तेरी प्रीत

आज पूरे हुए , मेरे प्रेम गीत।

 

 

 

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