जिन्दगी का सफर

वक्त सिहर गया
जिन्दगी का सफर एक पड़ाव पे जो
ठहर गया
न कोई गिले शिकवे
न रोना मुस्कुराना
आदमी चला गया
जो इस संसार में पीछे छूटा
वो सब सहम गया
अपनों के बिना यह बाकी
बचा
जिन्दगी का सफर आसान न
होगा
यादों का सामान साथ लेकर
चलना होगा
नहीं तो रास्ता काटना
आसान न होगा
भले हैं वो लोग जो
फिर से सफर के
हसीन मंजरों में उलझ
जाते हैं
लुत्फ लेने लगते हैं
दोबारा जिन्दगी का
गैरों की तो छोड़ो
अपनों को भूल जाते हैं
क्या हो उनका जो
सफर में आगे बढ़ते तो हैं
पर उस एक अपने अजीज से बिछड़ने वाले
मोड़ के दर्द से
उबर ही नहीं पाते हैं
कभी अपनों के साथ के
बिना
जीवन में मंजिल की
ओर कदम बढ़ा ही नहीं
पाते हैं
कहने को सांसें भरते हैं पर
जी ही नहीं पाते हैं।

मीनल

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