सारे जहाँ की खुशियाँ तेरे भी घर को आये

तू जगमगाये तेरा दीप जगमगाये ||
सारे जहाँ की खुशियाँ तेरे भी घर को आये ||
गंगा और यमुना सा निर्मल हो तेरा मन ||
अम्बर और धरा सा स्वच्छ हो तेरा तन ||
इस नगर में तेरी ज्योति चमचमाये ||

अच्छे कर्मो से जग में नाम होगा तेरा ||
तेरी आहट सुन बुराइया लेंगी नहीं बसेरा ||
तेरे मरने के बाद भी लोग तेरा नाम गाये ||
तू जगमगाये तेरा दीप जगमगाये ||
सारे जहाँ की खुशियाँ तेरे भी घर को आये ||

मिट जाये सारा अँधेरा न तेरी डगर में आये ||
आये कभी न गम जो देती है चिंताये ||
नाम अगर हो तेरा एक तराना टिमटिमाये ||
तू जगमगाये तेरा दीप जगमगाये ||
सारे जहाँ की खुशियाँ तेरे भी घर को आये ||

दूर करना भेद भाव संग सांप्रदायिक झगड़ा ||
कोई मरे न भूँखा और कोई रहे न कंगला ||
आने वाला कल तेरा नाम गुनगुनाये ||
तू जगमगाये तेरा दीप जगमगाये ||
सारे जहाँ की खुशियाँ तेरे भी घर को आये ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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