मेरे अल्फाज

1 हम शायर दर्दे दिल जो लिखते हैं अपनी दास्तां कागज पर उतारते हैं,पर ये दुनिया वाले हमारी जख्मों को कहाँ देख पाते हैं?और हमारी गम को फसाना समझकर तालियाँ बजाया करते हैं

2आसान नहीं है हसीनों से दिल लगाना इनकी नखड़ो से भी प्यार करना पड़ता है,अगर ये फीकी चाय बनाकर दे तो भी मीठा कहना पड़ता है

:कुमार किशन कीर्ति,युवा शायर

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Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

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