उठो प्यारे लाल

उठो प्यारे लाल अब सुबह हो चुकी है, पंछियां चहचहा रही हैं अब उठो प्यारे लाल,देखो प्यारी-प्यारी किरणें जग को सुंदर बना रही हैं, आलस त्याग कर सारें काम पर जा चुके हैं, उठो प्यारे लाल अब सुबह हो चुकी है मुर्गा बांग दे चुका है, कोयल रानी कुक रही है कलियाँ सब खिल चुकी हैं, अब तुम भी आलस त्यागो उठो प्यारे लाल,अब सुबह हो चुकी है

:कुमार किशन कीर्ति,युवा रचनाकार

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Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

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