हर घर दीवाली

मिट्टी के दीपक में
तेल में भीगी रुई की बाती से
प्रकाश की एक लौ जले
प्रेम के स्पर्श की परछाई जो
उसपे पड़े तो
उसका रोम रोम कुछ और जले
फूल के अंगार सा खिले
जीवन में यौवन का श्रृंगार
कुछ और अधिक भरे
अपने चरम पे चढ़े
मन में दबी भावनायें
प्रस्फुटित हो बाहर निकलें
अंधेरे के घर गिरें
रोशनी के भंवर हिलें
प्रसन्नता के कंवल खिलें
हर दिल में प्यार पले
हर पल एक दीप जले
हर बंधन हो रोशनी से
भरा
हर घर दीवाली हो
कहीं न हो अंधेरा भरा।

मीनल

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