मुझे न आया

चेहरा ढक लिया
हाथों से
माथा दबा दिया
अंगुलियों की पोरों से
पलकें भींच ली
आंसू रोक आंखों में
सांसे सहम गई
घुटती धड़कनों के तंग गलियारे में
परेशान हूं मैं
समय की गति से
समय के असमय प्रकट होते
आकस्मिक घटित होते
अप्रत्याशित निर्णयों से
समय की तेज धार के साथ
बहना मुझे न आया
समय के एक बिंदु पर
रुककर भी
पर जो बीत गया वो
पुनः वापिस हमने न पाया
बड़ी जटिल है यह यात्रा
समय की घड़ियों की
जो क्षण प्रति पल गुजर
रहे
अंतिम श्वास भर दम तोड़ रहे
मुझे पीछे छोड़ रहे
उन्हें पुनः प्राप्त या जीवित करना
मुझे न आया।

मीनल

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu