जिन्दगी की रफ्तार

जिन्दगी की रफ्तार थोड़ी
थामो नहीं तो
जिन्दगी हाथ से निकल जायेगी
बेमकसद मंजिलों की दौड़
को छोड़ो
खुद के लिये समय निकालकर
खुद की तरफ ही
चल पड़ो
कोई साथ चलने को न हो
तैय्यार
तो खुद की परछाई बनो
रहनुमा बनो
हौसलों के सिपाही बनो
दर्पण में देखो खुद की छवि
और मुस्कुरा लो
पतझड़ रौंद न दे बहारों को
उससे पहले सजा लो अपने
ख्वाबों की गली
पहिये सा जीवन घूमे
तुम समतल एक रास्ते से
चलो
चारों तरफ नजर घुमाओ
कोई भी हसीन मंजर तुमसे
न छूटे
आसमान और जमीन
जहां मिले
वहां तक चलो
उसके आगे
धरातल का छोर पकड़कर
कांटों भरी सुगंधित वातावरण की कठिन वादियों में तैरो
सपनों की ऊंची उड़ान भर
अपने मजबूत पंखों से पूरी कायनात का सफर
तय कर लो।

मीनल

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