बुद्ध के बोध से

जिन्दगी मुश्किलों भरी
आसान लगती है
तेरी एक खिलखिलाहट से
दिल की कली फूल बन
खिलकर महक उठती है
तेरी एक मुस्कुराहट से
तू कभी परेशान न होना
यूं ही सदैव मुस्कुराते रहना
एक सरल राग की बांसुरी की
धुन पे
यूं ही
जीवन का गीत अपने होठों से
गुनगुनाते रहना
कठिनाइयों का भंवर उत्पन्न
मत करना
जटिलताओं को जन्म मत
देना
पानी में गहरे उतरने की
चेष्टा मत करना
यूं ही
किनारे किनारे
अपने पैर फिसलने से
बचाकर
घाट की सीढ़ियों पे
टहलते रहना
कोई नौका आये तो
उसमें सवार होकर
नदिया के पार लग लेना
नहीं तो
सरलता से
सुगमता से
स्थिर मन से
बुद्ध के बोध से
घाट की सीढ़ी के एक कोने में
चुपचाप, मौन धारण किये, शांत चित्त से
निःशब्द से
बैठे रहना।

मीनल

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