मेरी बेटी

जब चलती मेरी गुडिया रानी॥

बजते घुघरू पाँव में॥

आ जा लली मेरी बाहों में॥

हर पल तुझको खुश रखूगी॥

सारी खुशियाँ पहनाऊँगी ॥

तू जो मांगे हीरे मोती ॥

अगर मिले तो लाऊगी॥

लली मेरी खुशिया बिखराए॥

धुप से लाऊ छाहो में ||

आ जा लली मेरी बाहों में॥

रहा न मुझको पुत्र मोह अब॥

तू ही मेरी तमन्ना है॥

इस जहा में नाम करोगी॥

हर पल तुझे सम्भलना है॥

हर घडी तुझे प्यार करू मै॥

बस जा मेरी आशाओं में॥

आ जा लली मेरी बाहों में॥

लोग कहेगे मुह से अपने॥

मेरा सपना सच्चा है॥

रोशन होगा नाम हमारा॥

सब कहे मेरा बच्चा है॥

हरदम प्यार करे तेरा साजन॥

तू चमके सारी दिशाओ में ॥

आ जा लली मेरी बाहों में॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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