दिल की एल्बम

मैं दर्पण में झांकती हूं
मेरी छवि बन जाती है
मैं दर्पण से हट जाती हूं
मेरी छवि भी मेरे संग संग
खिसक जाती है
तस्वीर जो मैं किसी की
अपनी आंखों के दर्पण में
उतारती हूं
उसमें रंग जो भरती हूं
प्यार के, विश्वास के
वो हमेशा के लिए
निसंदेह
दिल में बस जाती है
दिल की एल्बम जो खोलती
हूं
परत दर परत
मस्तिष्क के दृष्टिपटल पे
वो ही दिल में किसी की कैद
तस्वीर
उसकी याद लिए
उभर आती है
तैर जाती है
पुरानी मीठी बातों के
न जाने कितने अविस्मरणीय लम्हे लिए।

मीनल

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