जिन्दगी की किताब

मेरी तरफ पीठ है तुम्हारी
अंजान नहीं
जानी पहचानी सी लग रही हो
शेल्फ के खानों में लगी
किताबों में उलझी हो
पलट के देखो तो
पढूं तुम्हारे चेहरे की कहानी
तुम्हारी किताब का आखिरी पन्ना तो
मेरी जिन्दगी की किताब के
आखिरी पन्ने से पूरी तरह से
मिलता है
पहले पन्ने से आखिरी पन्ने तक
हो सकता है
कहानी भी एक ही हो
शब्दों का मेलजोल और
प्रस्तुति सिर्फ
पृथक हो
पर सम्भव है
भाव एक हो
संवाद का अर्थ एक हो
कहानी में जो कुछ हो
अनकहा
उसका तात्पर्य एक हो
पढ़ लो बेशक कितनी भी
किताबें
जिन्दगी से अलग इसमें कुछ न
मिलेगा
छू के तो देखो किसी की
जिन्दगी के किताब के बीच
रखा उसका एक धड़कता दिल
तुम्हें एक सुकून भरा
ताजे फूलों की खुशबू वाला
हवा का झोंका
एक सुखद अनुभव का अहसास तो
अवश्य मिलेगा।

मीनल

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