बेजुबान

खामोश रहकर भी
दिल में भरी
मोहब्बत की दास्तां बयां हो सकती है
कोई गर हो बेजुबान तो
उसकी भी जुबां हो सकती है
उसकी जो भी हो भावना
आंखों से बोल उठती है
झंकार तो दिल की धड़कनों से
बजती है
आवाज तो मन के धरातल से
लगती है
प्यार की कोई उम्र
कोई सीमा नहीं होती
यह कली तो बागबान के दिल में
खिलती है
प्रेम को प्रेम की राह होती है
इसकी न कोई मंजिल
न कोई इसे पाने की तरकीब
होती है
प्यार की अनुभूति तो एक रस की मीठी फुहार
होती है
इसमें लच्छेदार शब्दों के जाल की
अभिव्यक्ति की कोई गुंजाइश नहीं होती है।

मीनल

Rating: 4.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu