सीप मोती

सोचा
कुछ लिखने की भी आदत
डालूं
जो कुछ विचार उपजते हैं
मन में
उन्हें कागज के दिल पे
कलम की स्याही से
अक्षर दर अक्षर लिखकर
उतारूं
समुंदर की गहराई में
यदा कदा कहीं पड़े
सीप मोती
किनारे लग जाये तो
अच्छा है
तलहटी में पड़े पड़े ही जम जायें
तो इसमें किसी का क्या फायदा
क्या मजा है
जिन्दगी के हर रंग को
जी लें
हर फल का स्वाद चखें
खुद जियें दूसरों को भी जीने
की वजह दें
तो इसमें कुछ हासिल है
इसमें जीने का कुछ सिला है
जिन्दगी जियें नहीं
यूं ही गुजार दें
तो इसमें क्या लुत्फ है
जीने का मकसद
जीने की क्या वजह है।

मीनल

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