तुम्हारा पहला प्रेम पत्र

“तुम्हारा पहला प्रेमपत्र”

आज अलमारी की दराज में तुम्हारा प्रेम पत्र मिला जिसें मैंने अपनी सबसे अनमोल धरोहर की तरह सहेज कर रखा था।

पता है उसमें आज भी तुम्हारी लिपिस्टिक लगाकर चूमी गयी kiss की खुशबू आती है,

पर उसके साथ दियें गयें उस गुलाब की नही जो अब पूरी तरह सूखकर मुरझा गया है।

जिसकी सूखी पंखुडियाँ हाथ लगाने पर टूटनें लगी है।

न जानें तुमनें कितना बचकर छुपछुपाकर,घर के किसी एकान्त कोने में बैठकर वो खत लिखा होगा।

उस खत पर दिल का प्रतीक बनाकर उसमें हमारे नाम के पहलें अक्षर भी तुमनें सजायें और वो प्यार के अद्भुत जादुई शब्द 1 4 3।

तुमने अपने उस खत में अपनें हर वो जज्बात लिखे जो मुझसे सामने शर्म के कारण कभी कह न सकी थी।

वो शब्द जो तुमने लिखने से पहले न जानें कितनी बार सोचे होगें उस खत के माध्यम से तुमने अपनी सम्पूर्ण भावनाओं को समेट कर लिख दिया होगा।

आजकल के प्रेमियों ने तो महज आकर्षण को प्रेम मान लिया और इन चार अक्षरों (Love) को महज तीन अक्षरों (Sex)तक सीमित कर दिया।

इन्हें क्या पता प्रेम क्या होता है प्रेम तो अथाह सागर है जितना डूबों उतनी ही गहराई है इसमें।इनका प्रेम तो वस्त्रों की भातिँ बदलता रहता है।

प्रेमी से रातभर जितना चैट किया एक मिनट मे डिलीट ये क्या जानें सीमित शब्दो से बँधे प्रेम पत्र को।

खैर !जब मुझे पहली बार ये खत मिला था तो पहलें मैने उसे पढा़ था,फिर दोबारा ,तिबारा उस दिन से लेकर आज तक न जानें कितनी बार तुम्हारा खत पढ़ चुका हूँ।

आज फिर पढा़,

बस तुम्हारें जज्बात समझने के लिए,आज भी एक अजीब सा सुकुन मिलता है इसे पढ़कर।

जितनी बार पढ़ता हूँ,हर बार तुम्हारें शब्द आज भी दिल में पहुँच जातें हैं,भावनाएँ दिल में उतर जाती है।

महज एक पन्ने के उस प्रेम पत्र में तुमनें हमारे अगाध प्रेम की जीवन गाथा उकेर दी हो।

हमारें बीच के अन्नत प्रेम को तुमनें उस खत में पक्तियों से बाँध दिया हो।

तुमने खत की शुरुआत एक शायरी से की थी,और आखिर में लिखा था—

“इस पागल के खत को पढ़कर मुस्कुरा जरूर दीजिएगा,पहलें तो ऐसे नही थे बस अब हो गये हैं,तुम्हारी …. .. .”

आज भी इन लाइनों को पढ़कर मुस्कुरा तो देता हूँ पर आँखे आज भी गालों को भीगों देती हैं।

✍️तुम्हारा Shubhu😊

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shubhamvermapramod

writer,politician,social worker

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