काफिला जिन्दगी का

काफिला
जिन्दगी का
अकेला है
रेतीला है
आसमां में
न कोई पंछी
न बादल का टुकड़ा
न कोई रंग, न किरण
न जमीं पे कोई
सवेरा है
कांटे ही कांटे है
हर सूं
कठिन है सफर
मंजिल है दूर
न कोई हमसफर
न कोई फूलों का
डेरा
न इंसानों की बस्ती
न इंसानियत का
दूर दूर तक कहीं कोई बसेरा है।

मीनल

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