सतरंगी

सात रंग हम
सात सुर हम
सात ताल हम
सात सफलता के द्वार हम
तन मन से एक दूसरे पे फिदा
साथ साथ हाथ में हाथ डाले
एक गले का हार हम
सतरंगी इन्द्रधनुष का संसार हम
दिन चढ़े तो धूप खिले
उसकी चंपई किरणों से सरसों के तन
का अंग अंग सजे
उस चांदनी में नहाई सोने की परत चढ़ी
पीले रंग की परछाई का प्रतिबिम्ब जो मेरी देह
के दर्पण में पड़े
मेरे बदन का सौंदर्य पुलकित हो
महकता सा खिले
मैं एक कली सी मुस्काऊं
लचकती क्यारी क्यारी
एक सतरंगी तितली सी
पंख फैलाकर
खिल जाऊं
सात रंग के सपनों को भी
सात रंग की पोशाक पहनाकर
सजीला छबीला
एक नवयौवना के
नवयुग सपनों का नवयुवा बांका नौजवान
कर दूं
इस जिन्दगी की दौड़ती सड़क पे पांव धरने को
जो मिलती हो थोड़ी सी
अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने की
जमीं
उसके गालों पे सात रंगों के गुलाल
मल मल के
सुर्ख सिंदूरी लालिमा से
भरपूर लाल, गुलाबी,
नीला, पीला, हरा,
बैंगनी, नारंगी कर दूं।

मीनल

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