भरोसा

मैं सपनों की दुनिया में
विचरुं
उससे पहले धरातल के यथार्थ को
परख लूं
चारों तरफ नजर घुमाकर भी
जो नहीं दिखता
वो अक्सर देह के बहुत करीब
होता है
नजर खाती है अक्सर धोखा
जो नजरों से होता है ओझल
धुंधला, धूमिल
वो मन में बसी विश्वास की मूर्त की
तरह
मन की मरीचिका में ही खड़े
किसी शिकारी के शिकार की
भांति खड़ा होता है
जो जहां खड़ा है
वहीं खड़े रहना
विषम परिस्थितियों से मत
डरना, सहमना, घबराना
भगवान पे भरोसा रखना
वो तेरा मार्गदर्शन कर
तुझे सही दिशा में भगायेगा
तेरी मंजिल तक पहुंचायेगा
तेरी देह को सम्भालेगा
तेरे मन की मासूमियत को
तेरी रूह की रूहानियत को
तेरे दिल की सुंदर व सरल
भावनाओं की कोमलता को
बचायेगा।

मीनल

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