बहारों की सौगात

एक पहिये पे दौड़ती रफ्तार है
जिन्दगी
रफ्तार जो हुई तेज तो
पीछे छूट जाती है जिन्दगी
पकड़ में आती है मंजिल
पर न जाने कितने
खूबसूरत लम्हों को पीछे बहा
ले जाती है
जिन्दगी
बहारें कम
पतझड़ के मौसम
ज्यादा दस्तक देते हैं
बागों के सीने पर
फूलों के न होने से बेरंग
परिंदों के न होने से बेनूर हो
जाती है जब
जिन्दगी
बहारों के मौसम में
बहारों की यादें
बहारों से भरे दिल में
कैद कर लो
पतझड़ को हंसा दो
पतझड़ को सजा दो
पतझड़ को खिला दो
पतझड़ को बहारों की सौगात
दो
पतझड़ को बहारों का मजा
कभी कभी देती है जिंदगी।

मीनल

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