ट्रेन का सफर मदुरै से दिल्ली

नंदिनी सेन :- हुस्न से सजी जवानी से सजी एक साहित्यकार की एक लौती बेटी मुझे लोग प्यार से नंदिनी पुकारते है ॥
कैलाशी :- एक गरीब नाई शरीफ खान दान से हूँ पिता जी खेती किसानी करते थे पिता जी तो चल बसे लेकिन गरीबी अभी भी हमारा साथ नहीं छोड़ रही थी | मुझे पता है की पिता जी मेरे बचपन को कैसे मजबूरी में सवारे है हां इतना ही नहीं मै एक अशिक्षित गांव से भी हूँ जो की गरीबी की बजह से बीच में अटक गया हूँ और जिंदगी की गाड़ी धीरे धीरे चल रही यहाँ पर यह भी कहना जरूरी है कि मै अपने परिवार को आर्थिक तौर पर काफी मदद किया और ३ बच्चो का बाप लोग हमें प्यार से शम्भू कह के पुकारते है ॥
हमें भी हिंदी अवधी में कविताएं गाने लेख आलेख लिखने का शौक है संयोग से आप जैसे सुंदरी से मिलने का संयोग प्राप्त हुआ इस बात की हमें अधिक ख़ुशी है ॥
नंदिनी >> इस बात की हमें भी ख़ुशी है की हमारी और आप की जाति एक है और एक ही लाइन के आप और हम है। रही बात किस्सा कहानियो की तो मै भी स्क्रिप्ट राइटर हूँ किताबे कविताएं लिखने का हमें भी शौक अगर आप चाहे तो फेसबुक पर हमारी प्रोफाइल आप देख सकते है बहुत समय तक बात कर लिए चलो अब कुछ नाश्ता पानी हो जाए जी आप क्या लेंगे
कैलाशी :<< जी |
नंदिनी >> मतलब आप क्या खायेगे |
कैलाशी>> ओ आईसी अस यूं लाइक |
नंदिनी सेन >> ओ भइया दो बर्गर |
कैलाशी << शुद्ध और शाकाहारी |
नंदिनी >. ओ सिट आगे भोपाल आने वाला है शाल भूल गयी ॥
कैलाशी << मेरे पास लोई है रख लेना अपने पास जब सोना हो तो |
नंदिनी >> सोने के लिए अपने सीट पर चली गयी दोनों को नींद भी आ गयी अब रात के १२ बज रहे थे नंदिनी ठण्ड से कांपने लगी और कहने लगी सुनो जी ठण्ड लग रही है।
कैलाशी<< लो लोई ले लो खुद ठण्ड में सुकुड गए है।
नंदिनी को नहीं आ रही थी ऊपर देख कर ओ मई गॉड उनको भी ठण्ड लग रही लो ये लो अपनी लोई आप को ठण्ड लग रही ॥
कैलाशी >> और आप को ठण्ड लगेगी कैलाशी लोई ओढ़ कर सो गये ॥
नंदिनी >> ठण्ड से दांत बजने लगे।
कैलाशी << सुनो जी ये लो लोई मै फ्रेश होने जा राहू रात को ३ बज चुके है आप आराम से सो जाओ।
नंदिनी << कितने अच्छे है आप ??
कैलाशी : << सिर्फ अच्छे ही है बस
नंदिनी : सो जाती है
कैलाशी : चाय या काफी
नंदिनी :< काफी दोनों काफी पीते है तभी दिल्ली का स्टेशन आ जाता है दोनों आपस में बाते करते बात करते रहना आप की मदद जितना होगा करूगी।
कैलाशी : धन्यवाद अपने अपने दिशा की और चले जाते है.

शम्भू नाथ कैलाशी

 

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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