चाय की प्याली के साथ मेरा सफर

सर्द माहौल में
कुछ चाय की गर्माहट
कुछ लोगों की भीड़ की गुफ्तगू की
सुगबुगाहट
चाय की एक एक घूट भरते
गले से उतारते
ऐसा लगता है कि
कहीं एक अलग थलग दुनिया में
पहुंच गये
एक राहत भरे नशे का सफर
एक खुद को खुद के ही भीतर बसी
किसी दुनिया से जोड़ने का सफर
एक सारी दुनिया को खुद में
समाहित करने का सफर
एक खुद की तरह लोगों को भी
प्यार करने का सफर
एक दुनिया की हर चीज
को गहराई से समझने का सफर
सिर्फ किनारे किनारे नहीं
भावनाओं के पानी में
सिर से पांव तक डूब जाने का सफर
एक सूरज की नैय्या में
बैठ
गहरे समुन्दर की कोख में
अपनी रूह से चप्पू चलाते हुए
चांद के देश पहुंच जाने का सफर
गर्म अंगीठी की चादर से जज्बातों को
आहिस्ता आहिस्ता उतार
फिर ठंडी बर्फ की डली से
अहसासों को चखने का सफर
एक दुनिया के शोरगुल को
दूर छोड़ते
उनसे खुद का दामन छुड़ाते
एक चाय के खाली कप को
रेस्तरां की टेबल पे रखकर
भरे दिल को खाली
करते
खाली खाली कदमों से
फिर अंजान लोगों की
अनचाही चाहत से
भीड़ की चहल पहल से
खुद को खुद में तन्हा कैद
कर लेने का सफर।

मीनल

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