तू है जानी पहिचानी

आभास हुआ मुझको //
ये बात बहुत है पुरानी //
मेरा दिल यूं कहता है //
तू है जानी पहिचानी //

आँख तेरी मेरी आँखों से //
कही तो कभी टकरायी //
देख के मेरे यौवन को //
तू भी शायद मुस्कायी //
याद नहीं इतना तुझे //
दिया था कौन निशानी //
मेरा दिल यूं कहता है //
तू है जानी पहिचानी //

मेरे हाथ तेरे तन की //
पहचान बताते है //
मेरे होठ तेरे होठो पे //
एहसान जताते है //
मै बात सही कहता //
करता नहीं नदानी //

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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