बिलौरी तेरी आंखों में

पीली पीली
बिलौरी तेरी आंखों में
नारंगी शाम का सूरज डूब गया
तुझको पाकर
नीले आसमान की सीढ़ियों से उतरकर
तुझमें गहरे कहीं खो गया
मेरी मोहब्बत को तू अब बाहर
इस दुनिया में मत तलाश
आसमान की तरफ मत ताक
जमीं की तरफ मत देख
मैं तेरे भीतर हूं
बाहर कहीं नहीं
मैं तेरी आंखों में उगता एक
सूरज हूं
फिजा में फैली रोशनी से अब
न रख
सरोकार कोई
मेरे आगोश में सिमट आ
खुद करके अपना भी दरकिनार
देख कितनी रोशनी भरी है
भीतर
देख कितना असीम है प्यार का
यह अदभुत संसार
भटक मत मोहब्बत की तलाश में
एक नादान की तरह
दरिया की प्यास को संभाल ले
एक फरिश्ते नहीं तो
कम से कम
एक इंसान की तरह
मोहब्बत का एक दीपक तो जला
अपने दिल की दहलीज पे
देख कितने तारों से दीपक जगमगायेंगे
हर रात
तेरे बिना सूरज के आसमान में
चांद की पूजा की थाली में
सूरज के हिस्से की आरती लेकर।

मीनल

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