औरो को सुना रहा हूँ

बेवफा ने ठोकर मारा //
सरंगी बजा रहा हूँ //
अपने गमो दर्द को //
औरो को सुना रहा हूँ //
खिल गयी थी कलियाँ //
खुश्बू मुझे थी आयी //
बस गयी थी दिल में //
उसकी परछायी //
मतवालो की बाग़ में //
अकेले ही गा रहा हूँ //
चौपट हुयी जवानी //
सरंगी बजा रहा हूँ //
हर बात पे ओ खुश थी //
संग में मुझे नचाया //
मेरे सीधे भाव को //
उसने खूब पढ़ाया //
मुकर के ओ चली गयी //
जो बेसुरा ही गा रहा हूँ //
बेवफा ने ठोकर मारा //
सरंगी बजा रहा हूँ //
अपने गमो दर्द को //
औरो को सुना रहा हूँ //

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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