मेरे अल्फाज

हसीनों की दुनिया में उस निगाहों का इंतजार है, बना दे जो इस शायर को दीवाना ऐसी माशूका की तलाश है, मिलेगी मुझे किसी ना किसी मोड़ पर, ऐसा मेरा दिल मुझसे कहता है, तभी तो अब तक इस दिल को बड़े जतन से संभाल कर रखा है

मेरे दिल को तोड़कर कहाँ जाओगी? कभी ना कभी मुझे याद करोगी,यह दीवाना तेरा पीछा कभी ना छोड़ेगा,चाहे तुम मुझ पर कितना भी सितम करती जाओगी,कुसूर यही है मेरा तुझसे दिल लगाया है, पर कमबख्त इस दिल को तेरा ही चेहरा भाया है

:कुमार किशन कीर्ति,युवा शायर,लेखक

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Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

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