मोहब्बत के तार हिलाते

तन से तन मिले
मन से मन मिले
मेरा रूप, मेरा रंग
मेरे भाव, मेरे राग
मेरी विशालता, मेरी सरलता
मेरी समीपता, मेरी सहजता
दूरियों के धरातल पे
निकटता के पदचिन्ह मिले
जहां नभ झुके
जहां धरा उठे
जहां रेगिस्तान के झरने हो
जहां वादियों के पहाड़ हो
जहां न सूरज उगे
जहां न सांझ ढले
बस झिलमिलाते जुगनुओं के हाथों से
मोहब्बत के तार हिलाते
कटीली झाड़ियों के झंझावतों को झकझोरती
घुंघरूओं की
झंकार हो।

मीनल

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