कोई इमारत बनाओ तो

कोई इमारत बनाओ तो
उसमें एक घर भी सजाओ
महज लोगों को नहीं
उस घर में रिश्तों को भी बसाओ
मन में सोये जज्बातों को जगाओ
दिल में मंद पड़ी धड़कनों को बजाओ
घर के वीराने को कुछ कम करो
सन्नाटों की गहरी नींद से
शोर मचाकर इन्हें उठाओ
तेरे मेरे बीच बस एक दीवार का फासला
है
इस दीवार को गिराओ और
फासले मिटाओ
दर्पण पे धूल जमी है
खुद की सोच पे गलतफहमियों की
मैल पटी है
धूल धो डालो
मैल साफ कर डालो
मन की आंख खोलो
रोशनी में प्यार के हर्फ़ों को
साफ साफ पढ़ने की कोशिश
करो
प्यार की पौध को
नफरत के पानी से सींचना
बंद करो
जिन्होंने तुम्हें जन्म दिया
पाला पोसा बड़ा किया
उन्हें कोसना
उनकी भावनाओं से खिलवाड़
करना बंद करो
अपने घर का
परिवार का
खून के रिश्तों का
अपने वजूद का
अपने आत्मसम्मान का
महत्व समझो
पहले उन्हें सम्भालो
अपनी जिम्मेदारियों का भलीभांति
निर्वाह करो
जिन्दगी के हर मोड़ पे
इस सुहाने सफर में नये नये
लोग, दोस्त, रिश्ते,
संगी साथी तो मिलते
रहेंगे
पुराने रिश्तों को किनारे
लगा इन्हें अपने दिल में
जगह मत दो
जगह भरपूर है तो
जगह दो पर
किसी के बहकावे में आकर
अपने घर
अपने अपनों
खुद को
आग में मत झोंको
खुद का घर करते हो तबाह
तो तुम भी रहोगे इसमें शामिल
यह गांठ बांध लो
इस सत्य को स्वीकारो
जीते जी मरते दम तक
इसे कभी मत भूलो।

मीनल

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