जालिम तेरी जुदायी

तुमने बहार बन के //
मेरी नीद क्यों उड़ायी //
बर्दास्त नहीं होती //
जालिम तेरी जुदायी //
तन्हाइयो में जीना //
दुश्वार हो रहा है //
बाहो में आके ले लो //
मौसम भी कह रहा है //
जब जाना था दूर मुझसे //
फिर प्रीति क्यों लगायी //
बर्दास्त नहीं होती //
जालिम तेरी जुदायी //
केवल तुम्हारे सपने //
हमको दिखायी देते //
गालो का मेरे चुम्बन //
हिचकियों के संग लेते //
जब करना नहीं था प्यार //
तो बात क्यों बढ़ायी //
बर्दास्त नहीं होती //
जालिम तेरी जुदायी //

Shambhu Nath Kailashi

No votes yet.
Please wait...

शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

Leave a Reply

Close Menu