मेरे अल्फाज

चाँद से पूछो कभी क्यों चकोर उसकी याद में आँसू बहाता है?अगर इश्क इबादत है खुदा का,तो क्यों जमाना इश्क करनेवालों को तड़पाता हैं

सोचा ना था उनसे मुलाकात होगी यूँ ही किसी मोड़ पर आँखें चार होगी,अब बात जब इश्क पर आ ही गई है, तो सात फेरे की रस्में उनके साथ ही होगी

:कुमार किशन कीर्ति,बिहार

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Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

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