यदुनंदन लाल वर्मा लोधी राजपूत की कविताएं

यदुनंदन लाल वर्मा लोधी राजपूत की कविताएं

धर्म
नफरत हिंसा द्वेष घ्रणा का
ढूंढा तो आधार धर्म।
जितना खून बहा हैजग में
उसका भी आधार धर्म।
विश्व विवादों की जा जड़ में
देखा तो आधार धर्म।
भूख गरीबी औ शोषण का
इनका भी आधार धर्म।1

आतंकवाद का पहन के चोला
करता नर संहार धर्म।
छल प्रपंच का जाल रचाकर
ठगने का व्यापार धर्म।
रूढिबाद पाखंड बाद पाषाण.
बाद का खोल धर्म।
सारे पाप माफ हो जाते
लगता यह पचनोल धर्म।2

पोप पुजारी जी को करता
देखो मालामाल धर्म।
आंख के अंधे भक्तगणो को
करता यह कंगाल धर्म।
स्वर्ग नर्क भगवान भाग्य
का फैला यह भ्रमजाल धर्म।
तीर्थ औ ब्रत मे जा देखा
पोपो की हर चाल धर्म। 3

गांधी को गोली से उड़ाया
इसका भी आधार धर्म।
ईसा को सूली पे चढाया
इसका भी आधार धर्म।
ब्रूनो को जिंदा था जलाया
इसका भी आधार धर्म।
मोहम्मद साहब को भी सताया
इसका भी आधार धर्म। 4

किया अहिल्या का मुंह काला
इसका भी आधार धर्म।
एकलव्य का कटा अंगूठा
इसका भी आधार धर्म।
सति बृंदा के सत को लूटा
इसका भी आधार धर्म।
बचा कौन दुष्कर्म जगत मे
न जिसका आधार धर्म। 5

मंदिर मस्जिद बैर बढाते
इतना तो शैतान धर्म।
इनसे तो अच्छी मधुशाला
इतना तो बदनाम धर्म।
तर्क इसे न अच्छा लगता
अक्ल पे ताला पडा धर्म।
सुदंर सुघर सलोना मुखड़ा
दिल का काला किंतु धर्म। 6

ढोंगी औ पाखंडी कहते
हिंदू सिख इस्लाम धर्म।
संत फकीर सभी यह कहते
ईसा मूसा राम धर्म।
ज्ञानी ध्यानी सब जन कहते
वेद पुरान कुरान धर्म।
सौ बातो की बात एक है
मानव का इंसान धर्म।। 7

कोई कहता है आचार धर्म
कोई कहता है व्यवहार धर्म।
पर मेरी समझ मे यह आया
बस मानव का उपकार धर्म।
मानव सेवा ईश्वर सेबा
मानवता ही है सार धर्म।
कबिरा ने सिखाया प्यार धर्म
बरना आडम्बर यार धर्म। 8

यदुनंदन लाल लोधी हरदोई

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷Rahul Singh bauddha kushwaha khadiya ngla bharkhani Hardoi utter Pradesh

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