मेरे अल्फाज

ऐसी प्रेमभरी निगाहों से आईना देखती हूँ, जैसे सामने महबूब हो,और बस उसे ही देखती हूँ

इस दिल से एक खता हो गई,मैं उसका हो गया और’वो’मेरी हो गई,यह प्यार का सिलसिला कुछ ऐसे चला’वो’बेखबर रही और दुनिया को खबर हो गई

:कुमार किशन कीर्ति

No votes yet.
Please wait...

Kumar kishan kirti

युवा शायर,लेखक

Leave a Reply

Close Menu