राजा

राजा

एक समय एक राजा था । जिसके तीन पुत्र थे । वह अभिमानी होने के कारण हर प्रकार के काम को ऊँची श्रेणी के बिल्कुल अयोग्य
समझता था । और आलस्य को सच्ची कुलीनता का चिह्न समझता था । इसलिए उसने निश्चय किया कि वह अपना राज्य सबसे अधिक परिश्रमी और उधोगी को नहीं बल्कि तीनो में से सबसे अधिक आलसी को छोड़ जायेगा । इस बात की सूचना देकर उसने उनको अपने सम्मुख आने की आज्ञा दी, इसलिए कि हर एक अपने – अपने अधिकार का प्रतिपादन करे और अपने आलस्य का प्रमाण दे। सबसे बड़े से उसने कहा, “अच्छा तुम्हे राजकुट पर अधिकार के सम्बन्ध में क्या कहना हे ? उसने उत्तर दिया, महाराज एक दिन मौसम बहुत ठण्डा था मैने बड़े कमरे में तेज आग जलने की आज्ञा दी और उसके पास तापने के लिए बैठ गया, और यधपि आग इतनी तेज थी की उसने मेरी टांगे जला दी ? और मुझे दर्द की यंत्रणा देने लगी पर मै वास्तव में इतना काहिल था कि वहाँ से ना हटा । “जब वह जल चुका।

– सौरभ बिष्ट

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