बोलो प्रभु ! कौन हूँ मै? (कविता )

बोलो प्रभु !बोलो ! तुम्हें आज  बोलना होगा ,

कौन हूँ मै ? इस सवाल का जवाब देना होगा ।

मै औरत हूँ जगतजननी , शक्तिस्वरूपा अगर ,

क्योंकर बनाया मुझे भोग्या इस आदमी ने ?

मै इंसान हूँ एक जीती जागती ,ब्याँ करना होगा ।

मेरे सपने ,मेरे अरमान और मेरी खवाइशें ,

क्या कोई मायने रखते हैं तुम्हारे लिए ?

करते हो गर तुम स्वीकार तो इसे इस आदमी को भी

तुम्हें समझाना होगा ।

अहंकारी है जो , दंभी , वहशी , स्वार्थी ,कामुक पशु , दरिंदा ,

नहीं बर्दाश्त होता जिसे औरत का  आगे बढ़ना ,

नहीं रास आती उसकी चहुंमुखी तरक्की ,

जान जलती है उसकी ,

पृरुष अहम को ठेस जो लगती है उसके ,

इसीलिए रोकना चाहता है मेरा मार्ग इस तरह से ।

ईर्ष्यावश !! कुंठित होकर ,

मुझे खिलौना समझकर , मुझे प्रताड़ित कर,

कभी घर में कैद कर और कभी मेरा मान -मर्दन कर ,

मेरा आत्म-सम्मान , मेरी जिंदगी और मेरी आबरू को

समाप्त कर क्या साबित करना चाहता है? ,

तुझे समझना होगा।

अगर मै हूँ तेरी सर्व श्रेष्ठ रचना ,

है मुझमें तेरा ही अंश ,आत्म तत्व ,

तो मेरे लिए , मात्र मेरे लिए ,बस एक बार!  फिर !

धरती पर आना होगा ।

मेरे सवालों का जवाब देने हेतु तुझे एक बार तो सामने

आना ही होगा ।

आखिर कौन हूँ मै?  अब तुम्हें इस  पुरुष जगत को ,

अपनी विधि से , चाहे जैसे भी समझना होगा ।

मै नारी रूप में माँ, बहन, बीवी हूँ और बेटी भी ,

मैने हर रूप में अपना सारा जीवन दिया ,

इस पुरुष को सेवा दी, ममता दी, चाहत दी,

स्नेह दिया और अपना भोला मासूम बचपन भी ।

मगर इस कमजर्फ ,एहसान फरामोश आदमी ने मुझे क्या दिया ?

मुझे समझा केवल मांस का टुकड़ा !!

तुम क्यों अब तक इस घोर अन्याय ,अनाचार , पशुता पर भी

खामोश हो ?

बोलो प्रभु !  बोलो ! तुम्हें शीघ्र अति शीघ्र बोलना ही होगा ।

मेरे अस्तित्व पर  मंडरा रहा है खतरा ,

तुम्हें मेरा सरंक्षण करना होगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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ओनिका सेतिया 'अनु'

संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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