बाबा जी की चिलम

बाबा जी की चिलम चाकड़ी ॥
उठा के फेंका रामलली ॥
बाबा जी जब पूछन लागे ॥
चिलम चाकड़ी कहा है जी ॥
चिलम चाकडी पर्वत नीचे ॥
क्या कूद मरोगे बाबा जी ?
बाबा जी की चिलम चाकड़ी ॥
उठा के फेंका रामलली ॥

बाबा जी का धूनी कमण्डल ॥
उठा के फेंका राम लली ॥
बाबा जी ने पूछन लागो ॥
धूनी कमण्डल कहा लली ॥
धूनी कमण्डल पनघट ऊपर ॥
देख डरो गे बाबा जी ॥
बाबा जी की चिलम चाकड़ी ॥
उठा के फेंका रामलली ॥

बाबा जी के सिलबट्टे को ॥
उठा के फेंका रामलली ॥
बाबा जी जब पूछन लागे ॥
मेरा सिलबट्टा कहा लली ॥
सिलबट्टा है कोलिया बीचे ॥
क्या रुदन करोगे बाबा जी ?
बाबा जी की चिलम चाकड़ी ॥
उठा के फेंका रामलली ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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