शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा का जीवन परिचय

शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा का जीवन परिचय

🌹🌹नमो बुध्दाय🌹🌹
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🙏मातु पिता को शीश नवाऊं ।

अपनी जीवन कथा सुनाऊँ ।।
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शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

ग्राम खदिया नगला

शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

ग्राम खदिया नगला

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एक छोटा सा परिवार जिसमें केवल 7 लोग थे। बाबा का नाम ज्ञान सिंह तथा बूढ़ी मां राम कुमारी मेरे ताऊजी अहिवरन कुशवाहा पिता जी शम्भू कुशवाहा माता सुदामा जी भाई मोती लाल कुशवाहा ।

सन 2003 में बाबा की मृत्यु हो गई। और सन 2005 में बूढ़ी मां की मृत्यु हो गई।
पिताजी दूध की डेरी चलाते थे और खेतीबाड़ी देखने का कार्य करते थे।
लेकिन जब पिताजी ने देखा कि गरीबी पीछा नहीं छोड़ रही है तो उन्होंने हमें सन 2007 में एक जज साहब मृदुल एस कुमार सिंह के यहां भेज दिया। सोचा कि बेटा अच्छी जगह जाएगा और वहां पढ़ाई लिखाई अच्छी होगी और आगे परिवार उन्नति को प्राप्त होगा ।
परंतु साथियों एक स्वाभिमानी व्यक्ति स्वतंत्रता पूर्वक जीना चाहता है । उसे किसी भी प्रकार की दाब धौस स्वीकार नहीं होती है ।
सो मेरी सोच स्वाभिमानी मैं अपनी जिंदगी स्वाभिमान पूर्ण जीना चाहता था ।
उन लोगों के कुछ जातीय अव्यवहार को देखकर मैंने फैसला कर लिया कि मैं किसी भी कीमत पर यहां ठहरने वाला नहीं हूं । सो मै छः महीने के बाद मे वहा से चला आया और दोबारा बहुत बुलाने पर भी उनके यहां नहीं गया ।
साथियों सन् 2012 कम अवस्था में ही मेरा रीना कुशवाहा से विवाह हो गया । और इसी वर्ष मेरे ताऊजी का भी देहांत हो गया था।
मेरे अंदर एक भावना सदैव रहा करती थी कि मैं कुछ ऐसा करूं जिससे हमारा समाज एक नए रास्ते पर चले।
सो इस स्वप्न को साकार करने के लिए मैंने हिंदू धर्म की कथा को कहना प्रारंभ कर दिया।
कुछ समय के बाद हमें एक ऐसा मार्ग मिला जिसकी हमें सदैव तलाश थी
( क्योंकि मैं चाहता था कि मेरा वंश मेरी बिरादरी उच्च स्तर पर सम्मान को प्राप्त और हमारे कुशवाहा मौर्य शाक्य सैनी वर्ग के जितने भी महापुरुष पूर्वज हैं इनका नाम रोशन हो)

साथियों वह था बौद्ध धर्म बौद्ध धर्म मिलते ही हिंदू धर्म की कथा को कहना छोड़कर बौद्ध कथा वाचक बन गया।

मैने मैनपुरी के भिक्षु उपनन्द थेरा जी से धम्म दीक्षा ली ।🙏🙏

गीत संगीत में रुचि होने के कारण संगीत के माध्यम से ही बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार करना शुरू कर दिया । अपने महापुरुषों पूर्वजों का प्रसार प्रचार करना शुरू कर दिया।
दोस्तों अब इस बौद्ध धर्म के कारवां में मैं अकेला नहीं था ।
मेरे कुछ खास मित्र थे
विजय सिंह कुशवाहा रूपापुर से
राजेश कुशवाहा पाली से
उमेश चंद्र कुशवाहा खदिया नगला से
मौजी राम प्रधान ग्राम भरखनी से

पप्पू कुशवाहा भरखनी से
राम कुमार कुशवाहा रत्नापुर से रामसिंह कुशवाहा भरखनी से

🌼धीरे-धीरे 8 वर्षों में लगभग 6000 लोगों को बौद्ध धर्म धारण कराने का कार्य किया।
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शाक्य वंशी शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा खदिया नगला ।।

साधु 🔸🔸 साधु 🔸🔸 साधु

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