शिक्षा पर जुर्माना

शिक्षा जिसे विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण का साधन माना जाता है, जिसे भावी पीढ़ी का श्रेष्ठ नागरिक तैयार करने वाला समझा जाता है, जिसके गुण गाते सरस्वती भी नही थकती, उसकी हालत बद-से-बदतर हो चुकी है। वर्तमान में शिक्षा नीतियों द्वारा विद्यार्थियों और उनके माता-पिता का गला घोंटा जा रहा है। स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों को शिक्षा के उद्देश्यों से दूर करते जा रहे है। शिक्षा के नाम पर निजी स्कूल और कॉलेज प्रशासन द्वारा छोटी-छोटी बातों को मुद्दा बनाकर विद्यार्थियों से मनमाने तौर पर जुर्माना वसूल किया जा रहा है। सरकार और यूनिवर्सिटी के नियमों के विरुद्ध स्कूल और कॉलेज प्रशासन स्वयं अपनी इच्छानुसार नियम लागू कर जुर्माना वसूल करते है जिसे उनको तनिक भी शर्म नही आती। उदाहरण के तौर पर कॉलेज आते समय विद्यार्थी दस मिनट लेट क्या हो जाये, जुर्माने का पहाड़ खड़ा कर दिया जाता है, भले ही कारण कुछ भी रहा हो ? विशेषकर बी.एड. कॉलेजो एवं वर्तमान में शुरू हुए बी.ए. बी.एड. और बी.एस.सी. बी.एड. कॉलेजो में सरकार के प्रावधान के अनुसार विद्यार्थी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर कॉलेज पहुँचता है तो छोटी-छोटी बातों पर उनका शोषण किया जाता है। शिक्षकों और कॉलेज प्रशासन को इस बात की पहले से ही जानकारी है कि कॉलेज को सीटे हर वर्ष कोटे अनुसार निर्धारित होती है जिसमें कॉलेज स्वयं विद्यार्थियों की प्रवेश संख्या नही बढ़ा सकती है और न ही विद्यार्थी बीच मे कॉलेज छोड़ दूसरी कॉलेज में प्रवेश पा सकते है। कॉलेजों में इतनी फीस भरने के बाद भी मानो पैसे कम पड़ते हो वैसे विद्यार्थियों से एक-एक मुद्दें पर धन बटोरा जाता है। कॉलेज धन-धना-धन पैसे छापे जा रहा है मानो लूट मची हो कि कौन अधिक धन इकट्ठा करे। कोई विद्यार्थी एक दिन कॉलेज न आ पाए तो जुर्माने का तमाचा लग ही जाता है भले ही वह बीमार हुआ हो, दुर्घटना हुई हो या धरती इधर की उधर हो गयी हो उनसे उनका कोई लेना-देना नही है। बस! उन्हें पैसों की ही भूख है। विद्यार्थी भले ही प्रार्थना-पत्र दे या न दे पैसे जमा करने अनिवार्य होते है। पैसे न देने पर दूसरे कॉलेजो का उदाहरण दिया जाता है कि बाकी कॉलेजो में हमसे भी अधिक पैसे लेते है। विद्यार्थी द्वारा विरोध किये जाने पर तरह-तरह से डराया जाता है कि तेरी कॉलेज से छुट्टी कर दी जाएगी और चरित्र प्रमाण-पत्र पर गलत-सलत लिख दिया तो तेरा भविष्य खराब हो जाएगा। यदि शिक्षक ही विद्यार्थियों को इस तरह की बातें सिखाएगा तो भविष्य में वह भी शिक्षक बनकर अपने विद्यार्थियों से पैसे लेने में हिचकेंगे नही क्योंकि उन्होंने भी तो पैसे दिए थे। इसी प्रकार से देश मे विद्यार्थियों की अगली नस्ल पैदा की जा रही है। स्कूल और कॉलेज प्रशासन द्वारा बात-बात पर जुर्माना लगाया जाता है और पैसे भरने पर मजबूर किया जाता है।
आजकल कॉलेजो में सेटिंग करवाना भी एक फैशन बन चुका हैं जिसमे विद्यार्थियों से फीस के अलावा कुछ ओर रुपये लेकर सुविधाएं दी जाती है जैसे कॉलेज आने की जरूरत नही, केवल परीक्षा देने ही आना आदि। इसके अलावा कॉलेजों के कार्यक्रमों से भी मुक्त कर दिया जाता है। सरकार ने भले ही अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए और मनमानी रोकने के लिए कई योजनाएं बनाई है। कॉलेजों में फिंगरमशीन भी अनिवार्य कर दिया है इसके बावजूद कोई ना कोई जुगाड़ लगा ही लिया जाता है। कुछ यूनिवर्सिटियां भी उन कॉलेजों के साथ देती है। इस प्रकार की घटनाएं देख लगता है कि बाज़ारों में डिग्रियां बिक रही हो।
सरकार को भी इस मामले में सतर्कता बरतनी चाहिए आखिर देश का भविष्य जो ठहरा। सरकार ने इस तरह के मामलो को कानूनी पक्रिया के तहत उलझा रखा है जिस कारण विद्यार्थी भी बात आगे बढ़ाने में हिचकिचाते है। सरकार को ऐसे मुद्दों से निबटने के लिए विद्यार्थियों की समस्या का हल निकलना चाहिए। उन्हें शिकायत का सस्ता साधन उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थी बेझिझक अपना बिना नाम बताये उन मुद्दों को उठा कर सरकार का ध्यान देश का सुंदर भविष्य बनाने की ओर मोड़ सके।

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