बस आपस लड़वाओगे

लोगो को भड़काने वाले ||
खुद दंगा करवाने वाले ||
दर दर आग लगवाने वाले ||
खूब अफवाह फैलाने वाले ||
तुम कैसे देश बचाओगे ||
क्या मिटटी में इसे मिलाओगे ||
या देश बेच कर खाओगे ||

जनता के खून को पीने वाले ||
दुसरो के धन पर जीने वाले ||
तुम देश को कहाँ ले जाओगे ||
क्या मिटटी में इसे मिलाओगे ||
या देश बेच कर खाओगे ||

लोगो को दुःख देने वाले ||
सब के सुख को लेने वाले ||
तुम अमन चैन कैसे लाओगे ||
बस आपस लड़वाओगे ||
क्या मिटटी में इसे मिलाओगे ||
या देश बेच कर खाओगे ||

साम्प्रदायिकता उकसाने वाले ||
छुप कर आग लगाने वाले ||
युग सोने का कैसे लाओगे ||
बस मतलब का तीर चलाओगे ||
क्या मिटटी में इसे मिलाओगे ||
या देश बेच कर खाओगे ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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