मिलना है तो आज मिलो

मिलना है तो आज मिलो

अब याद मुझको मत आना ॥
फरियाद हमारी मान चलो ॥
गर प्यार तुम मुझसे करते हो ॥
तो मिलना है तो आज मिलो ॥ २

स्वागत में तुम्हारे कोर कसर ॥
कोई न सनम मैं छोडूगी ॥
खुशियो की बरसात करूगी ॥
बहुत गुब्बारे फोडूंगी ॥
जब जान छिड़कते हो मुझपर ॥
अब इतना तो एहसान करो ॥
गर प्यार तुम मुझसे करते हो ॥
तो मिलना है तो आज मिलो ॥ २

मैं बरहवो व्यंजन बनवाऊँगी ॥
अपने हाथ खिलाऊँगी ॥
सेज सजा के फूलो संग ॥
बाहो में यार झुलाऊगी ॥
अब प्रेम बाग़ में करो आगमन ॥
इतना तो शुभ काम करो ॥
गर प्यार तुम मुझसे करते हो ॥
तो मिलना है तो आज मिलो ॥ २

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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