जाने वाले वर्ष की यही बड़ी आशीष

अलविदा हो रहा हूँ ||
ले लो मेरी दुवाये ||
पलट कर के अब तो ||
आना नहीं है ||
तेरे जिंदगी के ||
झंझट में पड़ के ||
जीवन को यूं ही ||
गवाना नहीं है ||
बहुत देखा लीला ||
कसौटी कसा था ||
मुझे याद करना ||
यही तो सही है ||
घटी बहुत घटना ||
अनोखा हुआ था ||
मुझे वापस आना ||
जल्दी अब तो नहीं है ||
स्वागत करो अब ||
जो आ रहा है ||
आगे की रचना ||
उसी ने रची है ||
बुरे कर्म को छोड़ ||
बन जाओ लायक ||
बुजुर्गो ने बाते ||
ऐसी कही है ||
मेरी कामना है ||
करो नाम रोशन ||
यही बात तो ||
गर्भ में भी छुपी है ||
नज़ारे भी देखो ||
सितारे भी देखो ||
कलम भी हमारी ||
यही तक चली है||

शम्भू नाथ कैलाशी

 

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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