तस्वीर बदल दो मेरी तुम ॥

तस्वीर बदल दो मेरी तुम ॥
मै भी तेरी बन जाऊ ॥
चुटकी भर सिन्दूर लगा दो ॥
तेरे रंग में रंग जाऊ ॥
अपनी छाप मेरे पर छोडो ॥
लगी रहे बस तेरी धुन ॥
तस्वीर बदल दो मेरी तुम ॥

रंग बिरंगे फूलो से ||
तेरी बाहो की झूलो से ॥
हार पिन्हा दो प्यार का ॥
बारिश कर दो उपहार का ।।
सोयी आस जगा दो तुम ॥
तस्बीर बदल दो मेरी तुम ॥

जो ताक रहे है नजर गड़ाये ॥
नजर झुका के जायेगे ॥
मेरी तेरी प्रेम कहानी ॥
औरो को सुनाये गे ॥
लोग समझने लगे गे अपना ॥
नहीं छेड़े गे कोई धुन ॥
तस्वीर बदल दो मेरी तुम ॥

चटक मटक चेहरे पर रहता ॥
लोगो की बात खटकती है ॥
जिस गलियो से मै जाती हूँ ॥
ब्यंग की शैली चलती है ।।
मरने की नौबत न आये ||
उन लोगो की बाते सुन ॥
तस्वीर बदल दो मेरी तुम ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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